ज़िंदगी कभी हँसाती है, कभी रुलाती है।
दुख और दर्द बिना बुलाए मेहमान की तरह आ जाते हैं, लेकिन हमेशा नहीं रुकते।
हर मुश्किल के बाद एक नई सुबह ज़रूर आती है।
और हाँ, अगर ज़िंदगी बहुत ज़्यादा परेशान करे, तो आईने के सामने मुस्कुरा लेना…
कम से कम एक इंसान तो तुम्हें देखकर हँस ही देगा!
इसलिए आँसू भी संभालकर रखो और मुस्कान भी, क्योंकि दोनों ही ज़िंदगी की कहानी लिखते हैं।
ज़िंदगी की मुस्कान
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